नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?

07 Aug 2022   |    179

~ M. K.

M. K. answered this.

08 Aug 2022

नवरात्रि हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है।जो की दस दिनों तक मनाई जाती है।इसके नव दिन माता की अलग–अलग स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है।
हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व  का बहुत ज्यादा महत्व है।नवरात्रि का पावन पर्व साल में चार बार मनाया जाता है।जिसमें चैत्र नवरात्रि और शरद नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि होती है, जो कि माघ  और आषाढ़ मास में पड़ती है।सभी नवरात्रि में चैत्र मास की नवरात्रि  का धार्मिक इसलिए भी बढ़ जाता है।क्योंकि, इसके प्रथम दिन से ही हिंदू नव संवत्‍सर का आरंभ होता है। और शरद नवरात्रि जो अश्विन मास में मनाई जाती है। 
मां शेरावाली को कई नामों से जाना जाता है वह सदा शिव की अर्धांगिनी है आदि सतयुग के राजा दक्ष प्रजापति की पुत्री सती माता को शक्ति कहा जाता है शिव के कारण उनका नाम शक्ति है हालांकि उनका असली नाम दक्षायणी है।
नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?
दुर्गा पूजा क्यों मनाई जाती हैं:-
दुर्गा पूजा के पीछे कहानी यह है कि। एक महिषासुर नाम का राक्षस था। जिसने तपस्या करके भगवान ब्रह्मा से उनके प्रति समर्पण के कारण अमरता का उपहार दिया था। जिसका अर्थ था कि वह कभी मर नहीं सकता था। वादे ब्लॉक में काफी उपद्रव मचाने लगा। सभी देवी देवताओं ने अपनी शक्ति को मिलाकर मां दुर्गा का रूप अवतरित किया। देवी दुर्गा ने अश्विन के महीने में महिषासुर पर आक्रमण कर उसे 9 दिनों तक युद्ध किया और दसवे दिन  वध उसका वध कर दिया। इसलिए इन 9 दिनों को शक्ति की आराधना के लिए समर्पित कर दिया गया, इसलिए दुर्गा पूजा आश्विन मास में शरद ऋतु का प्रारंभ हो जाता है। इसलिए इसे शारदीय नवरात्रि भी कहा जाता है।
नवरात्रि के 9 दिन देवी शक्ति के 9 अलग-अलग रूप की पूजा होती है। पहेल दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कुष्मांडा, पाचंवे दिन स्कंद माता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नवें दिन मां सिद्धिदात्री के रूप की पूजा की जाती है।
१. नवरात्रि के पहले दिन यानि प्रतिपदा तिथि पर माता शैलपुत्री की पूजा का विधान है। इस दिन शक्ति की साधना गाय के घी से करनी चाहिए।मान्यता है कि देवी के शैलपुत्री स्वरूप को गाय का घी अर्पण करने से साधक को सुख-संपत्ति और आरोग्य की विशेष रूप से कृपा प्राप्त होती है।
नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?
२. नवरात्रि के दूसरे दिन यानि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है।मान्यता है कि इस दिन यदि देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा में शक्कर का भोग लगाकर पूजा की जाए तो साधक की आयु में वृद्धि होती है और उसका जीवन हमेशा सुखमय बना रहता है।
नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?
३.नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। इस दिन देवी दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा दूध से करने पर साधक को सभी प्रकार के दु:खों से मुक्ति मिलती है।
नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?
४. नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विधान है। माता के इस स्वरूप की पूजा में मालपुआ का नैवेद्य अर्पण करने पर व्यक्ति को देवी से बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?
५.नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विधान है। देवी भगवती के इस स्वरूप की पूजा में प्रसाद स्वरूप केले चढ़ाने और किसी ब्राह्मण को दान करने पर साधक का विवेक बढ़ता है. देवी की पूजा से उसमें निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।
नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?
६. नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है।इस दिन माता के इस स्वरूप की पूजा में शहद चढ़ाने और किसी ब्राह्मण को दान करने पर व्यक्ति के आकर्षण में बढ़ोत्तरी होती है और उसका आकर्षण बढ़ता है।
नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?
७.नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। इस दिन माता के इस स्वरूप की पूजा करते हुए नैवेद्य में गुड़ चढ़ाने और इसका दान किसी ब्राह्मण को करने से साधक के जीवन से जुड़े सभी विकार दूर होते हैं ,और उसे भविष्य में किसी भी आकस्मिक विपत्ति का कोई खतरा नहीं रहता है।
नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?
८. नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा का विधान है।इस दिन माता के इस पावन स्वरूप की पूजा करते समय नारियल का भोग अवश्य लगाना चाहिए।
 मान्यता है कि देवी को इस दिन नारियल चढ़ाने से साधक के जीवन से जुड़े सभी प्रकार के पाप और पीड़ा का शमन होता है।
नवरात्रि के नव दिनों में माता कि किस स्वरूप की पूजा की जाती है? तथा इन दिनों क्या करे?क्या न करे?
९.नवरात्रि के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा का विधाना हैं मान्यता है कि इस दिन इस दिन शक्ति की साधना में धान चढ़ाने और किसी ब्राह्मण को दान करने से साधक को लोक–परलोक का सुख प्राप्त होता है।
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