ईरान-इज़रायल तनाव के बीच भारत की बड़ी कार्रवाई,
6017 Jun 2025
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। इस बीच भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तेहरान में फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार 17 जून 2025 को घोषणा की कि तेहरान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को सुरक्षा कारणों से शहर से निकाल लिया गया है। इसके साथ ही कुछ भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया की सीमा के जरिए ईरान से सुरक्षित निकाला गया है। यह खबर न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। पिछले पांच दिनों से इजरायल और ईरान के बीच लगातार मिसाइल हमले हो रहे हैं। इजरायल ने ईरान के परमाणु स्थलों को निशाना बनाते हुए 13 जून को "ऑपरेशन राइजिंग लॉयन" शुरू किया था। ईरान का दावा है कि इन हमलों में 225 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के अनुसार, उर्मिया मेडिकल यूनिवर्सिटी के 110 भारतीय छात्रों को सुरक्षित तरीके से अर्मेनिया सीमा पर पहुंचाया गया, जिसमें कश्मीर घाटी के 90 छात्र शामिल हैं। साथ ही, सोमवार को तेहरान से करीब 600 छात्रों को क़ोम शहर पहुंचाया गया, जिसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। क़ोम में 60% से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय छात्र रहते हैं। छात्रों को शिराज और इस्फ़हान जैसे शहरों से भी निकालकर यज़्द जैसे सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया जा रहा है।
भारतीय दूतावास की सक्रिय भूमिका
भारतीय दूतावास ने तेहरान में 24x7 हेल्पलाइन स्थापित की है, जिसके नंबर इस प्रकार हैं: +989010144557, +989128109115 और +989128109109। दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) से अपील की है कि वे अपने संसाधनों का इस्तेमाल करके तेहरान छोड़कर सुरक्षित जगह पर चले जाएँ। विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में 24x7 नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है, जिसके संपर्क नंबर हैं: 1800118797 (टोल-फ्री), +91-11-23012113, और +91-9968291988 (व्हाट्सएप)। दूतावास ने छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए बसों और परिवहन के अन्य साधनों की व्यवस्था की।
आर्मेनिया के रास्ते निकासी
चूंकि ईरान का हवाई क्षेत्र बंद था, इसलिए भारत ने अर्मेनियाई सीमा के रास्ते निकासी का विकल्प चुना। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अपने अर्मेनियाई समकक्ष अरारत मिर्जोयान से बात की और ऑपरेशन में सहयोग मांगा। 110 छात्रों को एयरलिफ्ट करके आर्मेनिया ले जाया गया, जहां से वे 18 जून को दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले हैं। यह कदम भारत की कूटनीतिक ताकत और अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
हालांकि, अभी भी केरमानशाह में कुछ भारतीय छात्र फंसे हुए हैं, जो दूतावास से निकासी की मांग कर रहे हैं। केरमान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के छात्र फैजान ने कहा कि दूतावास लगातार संपर्क में है और भोजन, आश्रय और परिवहन की व्यवस्था कर रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अफगानिस्तान सीमा के रास्ते जल्द ही उनकी निकासी हो जाएगी।
वैश्विक संदर्भ और भारत की सतर्कता
यह ऑपरेशन आपातकालीन स्थिति में भारत की त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता को दर्शाता है। इजरायली सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इफी डेफ्रिन ने दावा किया कि उनकी सेना ने तेहरान के आसमान पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी-7 शिखर सम्मेलन को बीच में ही छोड़कर वाशिंगटन लौटने का फैसला किया, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव का संकेत है। भारत ने न केवल अपने छात्रों को निकाला, बल्कि अन्य भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी।
निष्कर्ष
इजराइल-ईरान संघर्ष के बीच, भारत का यह कदम न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी कूटनीतिक ताकत को भी उजागर करता है। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की त्वरित कार्रवाई ने हजारों लोगों को उम्मीद दी है। जैसे-जैसे स्थिति विकसित होती है, भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है।
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