भारत ने ऐसा क्या भेजा कि गदगद हो गया रूस, दिल खोलकर की तारीफ
1123 Jul 2025
असली दोस्त... भारत ने ऐसा क्या भेजा कि गदगद हो गया रूस, दिल खोलकर की तारीफ
परिचय: भारत-रूस की दोस्ती की नई मिसाल
भारत और रूस के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से बहुत गहरे रहे हैं। समय चाहे कोई भी रहा हो, दोनों देशों ने एक-दूसरे का हर हाल में साथ दिया है। हाल ही में भारत ने एक ऐसा कदम उठाया जिससे रूस न केवल गदगद हो गया, बल्कि उसने भारत की खुले दिल से तारीफ भी की। इस घटना ने दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को और मजबूती दी है।
क्या भेजा भारत ने जो रूस हो गया भावुक?
हाल ही में भारत ने रूस को बड़ी मात्रा में मानवीय सहायता सामग्री भेजी है, जिसमें दवाइयाँ, खाद्य सामग्री, मेडिकल इक्विपमेंट और जीवन रक्षक उपकरण शामिल हैं। यह सहायता ऐसे समय पर भेजी गई जब रूस को इसकी सबसे अधिक आवश्यकता थी — विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन में।
भारत ने यह सहायता बिना किसी राजनीतिक दबाव या स्वार्थ के भेजी, जो दर्शाता है कि भारत का दृष्टिकोण मानवता केंद्रित है, न कि केवल कूटनीतिक।
रूस की प्रतिक्रिया: "भारत है असली मित्र"
रूसी सरकार और मीडिया ने भारत की इस सहायता की दिल खोलकर सराहना की। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा:
"भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह केवल रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि सच्चा मित्र भी है।"
रूसी नागरिकों ने सोशल मीडिया पर भारत का धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत ने एक बार फिर "दोस्ती निभाने" का उदाहरण पेश किया है।
भारत-रूस संबंधों का इतिहास
भारत और रूस (पूर्व में सोवियत संघ) के बीच रिश्ते दशकों पुराने हैं। 1971 के भारत-पाक युद्ध में सोवियत संघ ने भारत का खुलकर समर्थन किया था। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञान, और तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों ने कई साझेदारियां की हैं।
कुछ प्रमुख साझेदारियाँ:
ब्रह्मोस मिसाइल का संयुक्त निर्माण
कुडनकुलम परमाणु संयंत्र में सहयोग
अंतरिक्ष मिशन गगनयान में सहयोग
वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे के पक्ष में मतदान
भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ नीति का उदाहरण
भारत ने हमेशा से ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ – “पूरा विश्व एक परिवार है” की नीति को अपनाया है। चाहे वह नेपाल में भूकंप हो, श्रीलंका में संकट या अफ्रीका में महामारी – भारत ने हमेशा मानवीय सहायता भेजी है।
रूस को भेजी गई यह सहायता भी उसी नीति का एक हिस्सा है। भारत बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद देश की सहायता करने को तत्पर रहता है
रूस के लिए भारत का यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?
विश्व मंच पर नैतिक समर्थन: जब अधिकांश देश रूस से दूरी बना रहे हैं, भारत ने मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी।
विश्वसनीयता में इजाफा: भारत की यह पहल उसे एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करती है।
द्विपक्षीय रिश्तों में मजबूती: इस सहायता ने रूस को यह एहसास दिलाया कि भारत हर हाल में उसके साथ खड़ा है।
भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?
भारत और रूस के बीच सहयोग आने वाले समय में और बढ़ने की संभावना है:
ऊर्जा क्षेत्र में निवेश
अंतरिक्ष अनुसंधान में सहयोग
नई रक्षा तकनीकों का विकास
रुपये-रूबल व्यापार प्रणाली का विस्तार
यह सहयोग सिर्फ रणनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी दिखाई देगा।
निष्कर्ष: भारत ने एक बार फिर निभाई दोस्ती
भारत का यह कदम दिखाता है कि वह केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से भी दोस्ती निभाता है। रूस के लिए भेजी गई यह सहायता केवल सामग्री नहीं थी, बल्कि उसमें बंधा था एक मित्र देश का स्नेह, सम्मान और समर्पण।
रूस की प्रतिक्रिया यह बताने के लिए काफी है कि भारत का यह प्रयास सिर्फ एक "डिप्लोमैटिक मूव" नहीं था, बल्कि दिल से किया गया निर्णय था। जब पूरी दुनिया राजनीति के तराजू पर चीजों को तोल रही है, भारत ने मानवता की राह चुनी — और यही उसे महान बनाता है।
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